Saturday, September 27, 2008

सुनिये साहिबान


सुनिये साहिबान,

मेहरबान, कदरदान

भारत के नौजवान,

मेरे भाई जान

आतंकियों का कोई

धर्म नहीं होता,

उनमें दया का

कोई मर्म नहीं होता

वो लेना चाहते हैं

सभी की जान

चाहे हिंदू हो

या फ़िर मुसलमान।