सुनिये साहिबान,
मेहरबान, कदरदान
भारत के नौजवान,
मेरे भाई जान
आतंकियों का कोई
धर्म नहीं होता,
उनमें दया का
कोई मर्म नहीं होता
वो लेना चाहते हैं
सभी की जान
चाहे हिंदू हो
या फ़िर मुसलमान।
मैं इस ब्लॉग द्वारा अपनी व अपने भाई सुमित प्रताप सिंह की रचनाएँ आपके समक्ष प्रस्तुत करुँगी। आशा है आपको अच्छी लगेंगी।
सुनिये साहिबान,
मेहरबान, कदरदान
भारत के नौजवान,
मेरे भाई जान
आतंकियों का कोई
धर्म नहीं होता,
उनमें दया का
कोई मर्म नहीं होता
वो लेना चाहते हैं
सभी की जान
चाहे हिंदू हो
या फ़िर मुसलमान।